डेली संवाद, नई दिल्ली। Mahadev Betting App: महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। अंतरराष्ट्रीय सट्टा सिंडिकेट के प्रमुख संचालक और मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। सीबीआई की विशेष टीम उसे ओमान की राजधानी मस्कट से अपनी अभिरक्षा में लेकर भारत पहुंची।
सौरभ चंद्राकर को अब रायपुर ले जाया जाएगा, जहां उसे विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा। कोर्ट में पेशी से पहले उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी कर उसे रायपुर लाया जाएगा।
अवैध सट्टा सिंडिकेट का प्रमोटर
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक के अवैध सट्टा सिंडिकेट का प्रमोटर और प्रमुख आरोपी है। वह सीबीआई के दो मामलों में वांछित था। इन मामलों में जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उसके खिलाफ एक मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
सूत्र बताते हैं कि सौरभ चंद्राकर सिर्फ चेहरा है, इसके पीछे देश के कई राज्यों में बड़े सट्टेबाज काम करते हैं। इसमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई, छत्तीसगढ़ के कई नेताओं और कारोबारियों के नाम शामिल हैं। सौरभ को उस समय भारत लाया गया है, जब पंजाब और उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले कुछ महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
इंटरपोल के रेड कॉर्नर पर हुई गिरफ्तारी
सीबीआई के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। इसी के आधार पर ओमान की रॉयल ओमान पुलिस ने उसे चिह्नित कर हिरासत में लिया।
इसके बाद सीबीआई और ईडी ने ओमान सरकार के समक्ष उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजे। जांच एजेंसियों ने उसके खिलाफ जुटाए गए सबूत भी संबंधित अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किए। अनुमति मिलने के बाद सीबीआई की विशेष टीम मस्कट पहुंची और उसे भारत लेकर आई।

क्रिकेट से लेकर फुटबॉल तक ऑनलाइन सट्टे का नेटवर्क
महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट में शामिल था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और अन्य आयोजनों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था।
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सट्टे के कारोबार को चलाने के लिए देशभर में फ्रेंचाइजी के रूप में पैनल और शाखाओं का नेटवर्क बनाया गया था। इन पैनलों के माध्यम से लोगों को सट्टा खेलने के लिए जोड़ा जाता था और उनसे रकम वसूली जाती थी।
म्यूल बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजी जाती थी रकम
जांच में सामने आया कि ऑनलाइन सट्टे से हासिल रकम को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों में जमा कराया जाता था। इसके बाद कई स्तरों पर लेनदेन के जरिए पैसों को छिपाया जाता था और हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।
जांच एजेंसियों को सिंडिकेट के संचालन में कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को संरक्षण राशि दिए जाने से जुड़े पहलुओं की भी जानकारी मिली है।
ईडी ने भारत और विदेशों में संपत्तियां की अटैच
महादेव सट्टा एप मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी लंबे समय से जांच कर रहा है। ईडी ने इस अवैध कारोबार से अर्जित धन से जुड़ी भारत और विदेशों में स्थित कई चल-अचल संपत्तियों को अटैच किया है। सौरभ चंद्राकर के खिलाफ भी ईडी ने अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
अब रायपुर की विशेष अदालत में होगी पेशी
सीबीआई ने छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। सौरभ चंद्राकर का भारत प्रत्यर्पण इस अंतरराष्ट्रीय सट्टा नेटवर्क के खिलाफ जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
सीबीआई ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया है। अब रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेशी के बाद सौरभ चंद्राकर के खिलाफ आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगी।