डेली संवाद, काठमांडू/नई दिल्ली। Nepal Tibet Flood News: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के रसुवा समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस आपदा में नेपाल और तिब्बत में अब तक 472 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल हैं। आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हालांकि, नेपाल सरकार ने भारत, चीन, अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों की ओर से भेजी गई विदेशी रेस्क्यू टीमों की पेशकश स्वीकार नहीं की है।
नेपाल में 469 लोगों की मौत की पुष्टि
नेपाल में इस आपदा से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 469 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 977 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

लापता लोगों में शामिल हैं—
517 विदेशी नागरिक
45 नेपाली सेना के जवान
41 नेपाल पुलिसकर्मी
कई इलाकों में सड़कें और पुल टूट जाने से राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
तिब्बत में भी भारी तबाही
नेपाल सीमा से लगे तिब्बत के इलाकों में भी अचानक आई बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है। यहां अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
लापता लोगों में करीब 260 विदेशी नागरिक शामिल बताए गए हैं। चीन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
नेपाल ने मदद क्यों ठुकराई?
नेपाल सरकार ने भारत, चीन, अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों की ओर से विदेशी बचाव दल भेजने की पेशकश ठुकरा दी है। सरकार का कहना है कि नेपाल की सेना और पुलिस राहत-बचाव अभियान संभालने में सक्षम हैं।

नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2015 के विनाशकारी भूकंप के दौरान बड़ी संख्या में विदेशी रेस्क्यू टीमों के पहुंचने से बचाव कार्यों में तालमेल की समस्याएं सामने आई थीं।
इसी अनुभव को देखते हुए इस बार विदेशी रेस्क्यू टीमों के बजाय आर्थिक और अन्य जरूरी सहायता लेने का फैसला किया गया है। भारत ने भी NDRF भेजने की पेशकश की थी, जिसे नेपाल ने स्वीकार नहीं किया।
नेपाल सेना ने 1,024 विदेशी नागरिकों को बचाया
नेपाल सेना राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई है। सेना के अनुसार, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे 1,024 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है।

बचाव दल लगातार—
फंसे हुए लोगों की तलाश कर रहे हैं
लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं
क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों का जायजा ले रहे हैं
दूरदराज के कटे हुए इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं
सुरंग में 100 लोग फंसे
नेपाल में बाढ़ के कारण त्रिशूली-3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में करीब 100 लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। नेपाली सेना की हेलिकॉप्टर रेस्क्यू टीमें उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर रही हैं।
नेपाल सेना के प्रवक्ता राजा राम बसनेत ने बताया कि फिलहाल सेना का मुख्य फोकस प्रभावित लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने पर है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इलाके से 350 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि करीब 100 लोगों के सुरंग में फंसे होने की बात कही गई है।
चीन ने सर्वे के लिए इंजीनियरों की टीम भेजी
इस बीच चीन ने नेपाल सीमा के पास तिब्बत में बनी एक अस्थायी झील का सर्वे शुरू कर दिया है। आशंका जताई जा रही है कि अगर झील का किनारा या प्राकृतिक अवरोध टूटता है तो बाढ़ का नया खतरा पैदा हो सकता है।
इसी को देखते हुए इंजीनियरों की टीम—हवाई सर्वे, तकनीकी जांच, और 3D मॉडलिंग के जरिए हालात का आकलन कर रही है।

तिब्बत से 555 फंसे पर्यटकों को निकाला गया
चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत में फंसे 555 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि बचाए गए इन पर्यटकों का आंकड़ा पहले जारी किए गए लापता या प्रभावित लोगों के आंकड़ों में शामिल है या नहीं। बचाए गए पर्यटक किन देशों के नागरिक हैं, इस संबंध में भी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
90 अमेरिकी नागरिक अब भी लापता
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई इस विनाशकारी बाढ़ के बाद करीब 90 अमेरिकी नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, उसे फिलहाल किसी अमेरिकी नागरिक की मौत की जानकारी नहीं मिली है, जबकि तीन अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
लापता अमेरिकी नागरिकों में कई लोग कैलाश पर्वत की तीर्थयात्रा पर गए हुए बताए जा रहे हैं। कैलाश पर्वत हिंदू, बौद्ध और अन्य धार्मिक परंपराओं के लोगों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है।
700 से ज्यादा विदेशी नागरिक प्रभावित
इस भीषण प्राकृतिक आपदा में 32 देशों के 700 से ज्यादा विदेशी नागरिकों के प्रभावित या लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, नेपाल में कम से कम 517 विदेशी नागरिक लापता बताए गए हैं। वहीं, चीन की ओर से तिब्बत में 260 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है।

गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा, बिहार में भी खतरा
नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ने लगा है। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से बिहार के कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ गया है।
बिहार के पुचहरिया गांव के बाबू टोला में स्थानीय लोगों ने पानी का स्तर लगातार बढ़ने की बात कही है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
हालात अब भी गंभीर
नेपाल और तिब्बत के प्रभावित इलाकों में हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने, सड़कों और पुलों के टूटने तथा कई क्षेत्रों के संपर्क से कट जाने के कारण राहत और बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
अधिकारियों और बचाव एजेंसियों की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर आंकड़ों में आगे बदलाव संभव है।